ગુરુવાર, 25 નવેમ્બર, 2021

दोस्तों शरीर को स्वस्थ रखने के उद्देश्य से मानव तरह तरह के व्यायाम करता रहता है, जिससे उसका शरीर स्वस्थ होता है, और शरीर से बीमारियों का नाश भी, वैसे ही मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के उद्देश्य से ध्यान करना चाहिए। मनुष्य ध्यान करने के लिए भी भिन्न भिन्न पद्धति अपनाता रहता है, उन्ही में से एक है, विपस्सना ध्यान (Vipassana meditation)

इसको करके हम जहाँ मानसिक रूप से स्वस्थ हो सकते है, वहीँ अपने ऊपर नियंत्रण भी रखना सीखते है। आज हम समझेंगे की कैसे इसको समझ कर इसका उपयोग किया जा सकता है और मानसिक रूप से स्वस्थ हुआ जा सकता है तो शुरू करते है, विपस्सना ध्यान को समझकर उपयोग करने की। 

विपस्सना ध्यान क्या है? What is Vipassana meditation in Hindi?

इसके उपयोग को समझने से पहले हम समझेंगे की – विपस्सना ध्यान होता क्या है? असल में विपासना ध्यान, मन को स्वस्थ, शांत और निर्मल करने की वैज्ञानिक विधि होती है। यह आत्मनिरीक्षण की एक प्रभावकारी विधि है। इससे आत्मशुद्धि की जाती है। दूसरे शब्दों में इसे मन का व्यायाम कहा जा सकता है। 

जिस तरह शारीरिक व्यायाम करने से शरीर को स्वस्थ और मज़बूती प्रदान की जाती है, वैसे ही विपस्सना ध्यान से मन को स्वस्थ बनाया जा सकता है। हर परिस्थिथियो का सामना करने के उद्देश्य से इस ध्यान का उपयोग किया जाता है और इसके निरंतर अभ्यास से मन हर स्थिति में संतुलित रहता है।

असल में विपस्सना शब्द पाली भाषा के शब्द ‘पस्सना’ से बना है, जिसका अर्थ है “देखना” (जो चीज जैसी है, उसे उसके सही रूप में देखना)

यह तकनीक हजारों साल पहले की तकनीक है, इसका उद्धव लगभग 2600 साल पहले महात्मा बुद्ध द्वारा किया गया। बीच में यह विद्या लुप्त हो गई थी। दिवंगत सत्य नारायण गोयनका सन 1969 में इसे म्यांमार से भारत लेकर आए।

चलती हुई श्वास को; जैसी चल रही है बस बैठकर उसे देखते रहना है ही विपस्सना ध्यान कहलाता है। इसको हम उदाहरणों की मदद से समझने का प्रयास करेंगे, जैसे राह के किनारे बैठकर कोई राह चलते यात्रियों को देखता है, वह क्या कर रहा है और कहाँ जा रहा है, उसकी सारी गतिविधिओ को देखता है। नदी-तट पर बैठ कर नदी की बहती धार को देखता है उसमे उपस्थित मछलियों को देखता है। 

राह से निकलती हुई कारें, बसें आदि को देखता है, कहने का तात्पर्य है जो भी है, जैसा है, उसको वैसा ही देखते रहना ही विपस्सना ध्यान है। जरा भी उसे बदलने की कोशिश नही करना चाहिए। बस शांत बैठ कर श्वास को देखते रहना और देखते-देखते ही श्वास और शांत हो जाती है। क्योंकि देखने में ही शांति है। इसी को विपस्सना ध्यान कहा जाता है।

 

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